प्राकृतिक जैसी सुगंध
गुलाबी मिठास भरी खुशबू, जो हमें बचपन से ही जानी-पहचानी सी लगती है, लेकिन इसके बावज़ूद इसकी फ्रेशनेस आपको कुछ अलग सी मधुरिमा महसूस कराएगी। सुबह की ओस में भीगे गुलाबों से उठने वाली भीनी-भीनी महक से आप इसकी तुलना कर सकते हैं।
सौंदर्य और श्रृंगार की सुखद अनुभतियों से विकसित यह सुगंध राधा-रानी को प्रिय मानी गई है। रात में प्रकृति की निस्तब्धता से ऊर्जा लेकर वातावरण को रहस्यमयी बना देने वाली यह सुगंध आदिकाल से ही सुरूचिपूर्ण लोगों को आह्लादित और भावविभोर करती रही है, और अनुरागपूर्ण समीर के सुकोमल पंखों पर सवार होकर बरसाना-वृंदावन रूपी गंगोत्री से समस्त जगत की ओर प्रेम-गंगा का प्रवाह ले जाती है।
यूनान और मिस्र की 3 से 4 हजार साल पुरानी सभ्यताओं में देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए आहूत इस खुशबू का बदलते समय के साथ 'ओरिएंटल' में रूपांतरण हुआ, जो अपनी समृद्ध गर्मजोशी के साथ कालांतर में दीर्घायु का प्रतीक बन गई। जीवाश्मों और वृक्षों के रेजिन की सम्मिलित आरामदेह गंध वाली इसकी स्वर्णिम आभा, खुशबुओं के संसार में इसे सबसे अलग, सबसे विशिष्ट स्थान दिलाती है।
यह सुगंध मन की व्याकुलता और उद्विग्नता को शांत करने वाली मानी जाती है। इसकी मादकता जीवन में प्रकृति के विश्वास से एकरूपता का आभास आपके अवचेतन मन को इस तरह प्रदान करती है, जिसे बताया तो नहीं जा सकता, सिर्फ महसूस किया जा सकता है।
बरसात हो चुकने के बाद भीगी हुई मिट्टी की सोंधी खुशबू याद दिलाने वाली वन-कस्तूरी में एक वन्य मिठास है, जिसकी रहस्यमयी मोहकता आपको एक जादुई अहसास प्रदान करती है। येलो एंड ग्रीन्स की वन-कस्तूरी आपके पूरे अस्तित्व को एक अलौकिक मधुरता से ओत-प्रोत करने के लिए पर्याप्त है।